Poor education level

भारत के स्कूल-कालेजों में अपेक्षाकृत अधिक छात्र दाखिला ले रहे हें लेकिन देश में शिक्षा का स्तर खराब है। यह बात विश्व बैंक की शिक्षा निदेशक एलिजाबेथ एम किंग ने शिक्षा संबंधी विश्व अन्वेषण सम्मेलन के मौके पर कही।

उन्होंने कहा कि ज्यादा बच्चों को हर साल स्कूल और कालेज में दाखिला देना काफी नहीं है आपको उन्हें अंतरराष्ट्रीय मानकों के बराबर लाना होगा। किंग ने कहा कि विश्व बैंक को उम्मीद है कि भारत विश्व में सर्वश्रेष्ठ से साथ प्रतियोगिता का लक्ष्य रखे। उन्होंने कहा कि हालांकि भारत में आईआईटी और आईआईएम जैसे कुछ अच्छे संस्थान भी हैं लेकिन वे शिक्षा की गुणवत्ता के लिहाज से एमआईटी और लीड्स जैसे संस्थानों की तरह उच्च
 स्तरीय नहीं हैं।किंग ने कहा कि हालांकि भारत के पास एक कुशल शिक्षा नीति बनाने के संसाधन हैं लेकिन संसाधन का असमान वितरण चिंता का विषय है। किंग ने कहा यहां तक कि जो आईआईटी और आईआईएम भी पहुंच पाते हैं वे अमीर परिवारों के होते हैं, गरीबों के लिए मौके कहां हैं। सरकार कोष का उचित तरीके से उपयोग नहीं कर रही है।

उन्होंने हालांकि मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत के भविष्य के संबंध में उनकी दष्टि अच्छी है और वे प्रौद्योगिकी अन्वेषण के प्रति खुले विचार के हैं। किंग ने हरियाणा की बच्चियों से जुड़ी शिक्षा नीति की प्रशंसा की और कहा कि उन्होंने ब्राजील में भी हाल में ऐसी नीति पर अमल करते देखा। उन्होंने कहा कि ऐसी योजनाओं से न सिर्फ लड़कियों में साक्षरता की दर में वृद्धि करने में मदद मिलेगी बल्कि इससे लड़कियों की जल्दी शादी की आशंका भी दूर होगी।
 

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