सत भगति न करने से बहुत दुख होता है 1 सत भगति न करने से मनुष्य लख चौरासी में चला जाता है ओर बहुत दुःख उठाने पड़ते हैं 2 इस संसार में जबतक जीवन रहता है तब तक दुःखी रहता है आर्थिक स्थिति से भौतिक स्थिति से मानसिक तनाव से प्रत्येक वस्तु की कमी रहती हैं 3 इस संसार में दुःख सिवा कुछ भी नहीं सत भगति न करने पर दुःख ही दुःख ह सत भगति केसे करनी होती हैं सत भगति शास्त्रों के अनुसार करनी होती हैं शास्त्र गीता, चारों वेद ऋग्वेद, अथर्ववेद, सामवेद, यजुर्वेद ये हिन्दू धर्म के शास्त्र अब मुस्लिम धर्म के शास्त्र कुरान शरीफ, बाइबल, तोरेत इंजील, जेबुर, सिक्ख धर्म के शास्त्र गुरु ग्रन्थ साहिब आदि के आधार पर की जाती हैं सत भगति इस समय सत भगति कोन करवा रहा है और कोन कर रहा है इस समय सत भगति संत रामपाल जी महाराज करवा रहे हैं जो की सभी धर्म ग्रंथो के आधार पर ज्ञान बताते हैं ओर सत भगति करवाते हैं अवश्य देखिए www.jgatgururampalji.org Spiritual leader santrampalji mharaj www.jgatgururampalji.org Spiritual leader santrampalji mharaj
जन्माष्टमी 2020 देवताओं में भगवान श्री कृष्ण विष्णु के अकेले ऐसे अवतार हैं जिनके जीवन के हर पड़ाव के अलग रंग दिखाई देते हैं। उनका बचपन लीलाओं से भरा पड़ा है। उनकी जवानी रासलीलाओं की कहानी कहती है, एक राजा और मित्र के रूप में वे भगवद् भक्त और गरीबों के दुखहर्ता बनते हैं तो युद्ध में कुशल नितिज्ञ। महाभारत में गीता के उपदेश से कर्तव्यनिष्ठा का जो पाठ भगवान श्री कृष्ण ने पढ़ाया है आज भी उसका अध्ययन करने पर हर बार नये अर्थ निकल कर सामने आते हैं। भगवान श्री कृष्ण के जन्म लेने से लेकर उनकी मृत्यु तक अनेक रोमांचक कहानियां है। इन्ही श्री कृष्ण के जन्मदिन को हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले और भगवान श्री कृष्ण को अपना आराध्य मानने वाले जन्माष्टमी के रूप में मनाते हैं। इस दिन भगवान श्री कृष्ण की कृपा पाने के लिये भक्तजन उपवास रखते हैं और श्री कृष्ण की पूजा अर्चना करते हैं। कब हुआ श्री कृष्ण का जन्म जन्माष्टमी भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव को ही कहा जाता है। पौराणिक ग्रंथों के मतानुसार श्री कृष्ण का जन्म का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि के समय हुआ था...
भारत के स्कूल-कालेजों में अपेक्षाकृत अधिक छात्र दाखिला ले रहे हें लेकिन देश में शिक्षा का स्तर खराब है। यह बात विश्व बैंक की शिक्षा निदेशक एलिजाबेथ एम किंग ने शिक्षा संबंधी विश्व अन्वेषण सम्मेलन के मौके पर कही। उन्होंने कहा कि ज्यादा बच्चों को हर साल स्कूल और कालेज में दाखिला देना काफी नहीं है आपको उन्हें अंतरराष्ट्रीय मानकों के बराबर लाना होगा। किंग ने कहा कि विश्व बैंक को उम्मीद है कि भारत विश्व में सर्वश्रेष्ठ से साथ प्रतियोगिता का लक्ष्य रखे। उन्होंने कहा कि हालांकि भारत में आईआईटी और आईआईएम जैसे कुछ अच्छे संस्थान भी हैं लेकिन वे शिक्षा की गुणवत्ता के लिहाज से एमआईटी और लीड्स जैसे संस्थानों की तरह उच्च स्तरीय नहीं हैं।किंग ने कहा कि हालांकि भारत के पास एक कुशल शिक्षा नीति बनाने के संसाधन हैं लेकिन संसाधन का असमान वितरण चिंता का विषय है। किंग ने कहा यहां तक कि जो आईआईटी और आईआईएम भी पहुंच पाते हैं वे अमीर परिवारों के होते हैं, गरीबों के लिए मौके कहां हैं। सरकार कोष का उचित तरीके से उपयोग नहीं कर रही है। उन्होंने हालांकि मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल की प्रशंस...
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