भक्ति न करने से बहुत दुख होगा
सूक्ष्म वेद में कहा है
यह संसार समझता नहीं कहता शाम दोपहरनू गरीबदास यह वक्त जात है रोओगे इस पहरे नू
आध्यात्मिक ज्ञान के अभाव से परमात्मा की विधान से परिचित न होने के कारण यह प्राणी इस दुखों के घर संसार में महान कष्ट झेल रहा है और इसी को सुख स्थान मान रहा है जैसे एक व्यक्ति जून के महीने में दिन के 12:00 बजे हरियाणा प्रांत में शराब पीकर चिलचिलाती धूप में गिरा पड़ा है पसीनों से बुरा हाल हैं रेत शरीर से लिपटा हुआ है एक व्यक्ति ने कहा है भाई उठ तुझे वृक्ष के नीचे बैठा दूं तू यहां पर गर्मी में चल रहा है शराबी बोला कि मैं बिल्कुल ठीक हूं मौज हो रही है कोई कष्ट नहीं है
© एक व्यक्ति किसी कारण कोर्ट में गया वहां उसका रिश्तेदार मिला एक दूसरे से कुशल मंगल पूछ दोनों ने कहा सब ठीक है मौज है
+ एक व्यक्ति का इकलौता पुत्र बहुत रोगी था उसको पीजीआई में भर्ती करा रखा था लड़के की बचने की आशा बहुत कम थी ऐसी स्थिति में माता-पिता की क्या दशा होती है आसानी से समझी जा सकती हैं रिश्तेदार मिलने आए और पूछा कि बच्चे का क्या हाल है पिता ने बताया कि बचने का भरोसा नहीं फिर पूछा और कुशल मंगल है पिता ने कहा कि समाज है
विचार करें :- शराब के नशे में घोर धूप के ताप को झेल रहा रहा था फिर भी कह रहा था कि मौज हो रही है
∆ कोर्ट कचहरी में जो रिश्तेदार मिले दोनों ही कह रहे थे कि सब मौज है विचार करें जो व्यक्ति कोर्ट के कोल्हू में फ़शा है उसको स्वपन में भी सुख नहीं होता फिर भी दोनों कह रहे थे कि मौज है अर्थात आनंद है
∆ जिस व्यक्ति का इकलौता पुत्र मृत्यु सैया पर हो उसको मौज कैसी है इसलिए सूक्ष्म वेद में कहा है कि इस दुखिया ले संसार में यह प्राणी मां कष्ट को सुख मान रहा है
यह संसार समझदार नाही कहता शाम दोपहर रेनू गरीबदास यह वक्त जात है रोओगे इस पहरे
*संत गरीबदास जी ने बताया है कि मनुष्य जन्म प्राप्त करके जो व्यक्ति बत्ती नहीं करता वह कुत्ते गधे आदि आदि की योनि में कष्ट उठाता है कुत्ता रात्रि में आसमान की ओर मुख करके रोता है इसलिए गरीब दास जी ने बताया है कि यह मानव शरीर का वक्त एक बार हाथ से निकल गया और भक्ति नहीं की तो इस समय को याद करके रोया करोगे*
आइए अब जानते है सुखी इंसान
पहली बात वो पूर्ण संत की शरण में होगा
दूसरी बात वो भगवान से मिला है
तीसरी बात आस पास के लोगों से अलग ही तरह की रहन सहन होगी उस वेक्ति की
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